“सबको पैसा गारंटी एक गेम चेंजर”

हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ऐलान किया है के अगर 2019 में कांग्रेस सरकार बनाती है तो हर एक गरीब को न्यूनतम आय की गारंटी सुनिश्चित करेगी | कुछ लोग इसे चुनावी जुमला बता रहे है तो वहीं कुछ लोग इसे गेम चेंजर के रूप में देख रहे है |इसे जानने के लिए ट्विटर के माध्यम से टाइम्स नाउ ने एक सर्वे किया और 33815 लोगो में से 64% लोग मान रहे है के ये एक गेम चेंजर साबित होगा और जबकि 36% लोगो का मानना है के ये चुनावी जुमला है |अगर इसे आधार माना भी जाए तो कांग्रेस के इतिहास में ऐसी योजनाए पहले भी ला चुकी है और लोगो तक पैसा पहुंचा भी चुकी है यहाँ हम मनरेगा व फ़ूड सिक्योरिटी बिल की बात कर रहे है |जो कि सफल योजनाए हैं | देखना ये होगा की इसका कितना असर जनता के मूड पर देखने को मिलेगा| उधर BJP के रवि शंकर प्रसाद इसे चुनावी जुमला बताते हुए ताल ठोक रहे हैं, दिलचस्प होगा BJP इसके खिलाफ क्या कदम उठाती ताकि लोगो को अपने तरीक़े से इसे एक चुनावी स्टंट साबित कर सके |

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परियां असुरक्षित हैं !

परियाँ असुरक्षित हैं !
 
अख़बार पढ़ते हुए ………
 
वो रो रही थी , मैं पढ़ रहा था  
               शायद पढ़ ही सकता था !
रूह उबाल से छलनी थी 
लेकिन उबाल निकालने पर पाबंधी है  |
 
सोचा और शांत हो बैठ गया,
          मस्तिष्क गृहस्थी और पंखुड़ी 
                            की तरफ चला गया  |
 
शाम हुयी खबर आयी के रो रही 
                       किसी की बेटी थी 
जो अपना सब कुछ खो चुकी  
                                      बेटी थी  |
 
खून खौला पर हाथ वश कुछ नहीं        
         टेलीविज़न डिबेट और प्रणाम  
                                         कुछ नहीं   |
 
सुबह का सूरज आज कुछ मुरझा 
                                      रहा था 
शायद समाज की गन्दी सूरत 
                               दिखा रहा था  |
लेकिन बेटियां बचाने का 
             शोर शराबा तो बहुत था 
या, फिर से हो रहा शलावा बहुत था   |
 
हम कब तक देख कर करेंगे अनदेखा 
हकूमत-ए-मंज़र एक सवालिया निशान, 
                          कब तक करेंगे अनदेखा  ?
 
अकह सवालो की संवेदनशीलता 
                                    है मर गयी  
क्या भय की आंधी अंदर, 
                                  घर कर गयी ?
 
मन में आया प्रजा से दरख़्वास्त करु
                रोती बिलखती कलियों के 
                               संरक्षण् हेतु क्या करु  |
 
फैसला किया..;
फिरसे अलख का द्वीप जलाना होगा  
विराग में मुरझाई फुलझड़ियों को  
                    गले से लगाना होगा  
इस निपुन्सक समाज के उजड़े चमन  
                            को बसाना होगा 
दोषियों का सूत समेत ब्याज़
                                 चुकाना होगा   |
आएं एक सुन्दर आदरणीय 
                                 माहौल बनाएं  
अपनी प्यारी न्यारी  पंखुड़ियों  के 
                  रहने लायक समाज बनाएं  |
 
 
                       ….बिक्रम चत्तोवाल 

Poem : हवाएं पैग़ाम लायी हैं

हवाएं पैग़ाम लायी है !
हिंसात्मक आँधियों से टूटे घर बनाने आयी हैं
हवाएं पैग़ाम लायी हैं
खिलखिलातीं विलक्षणताओं में अँधेरा क्यों छा गया
कभी ना ग्रस्त होने वाला भाईचारा समुद्र में समा गया
आवाम के नुमाइंदों को समझाने आयी हैं
हवाएं पैग़ाम लायी हैं
अनसुलझी पहेलियाँ तो बहुत हैं

स्थापित किये जाने वाले मुक़ाम बहुत हैं
बनावटी चेहरों पर खुशनुमा मुस्कान बहुत है
मासूमों की किलकारियां जन्नत के द्वार लायी हैं
हवाएं पैग़ाम लायी हैं

 

नकारात्मकता की नुमाइशों का बोलबाला जगह जगह
भाई बंधुओं में खून का सैलाबी खेल, जगह जगह
अर्ध सत्य को सत्य बनाने की खिताबी जंग, जगह जगह

प्रचार प्रसार में धुत्त वज़ीरे आज़मो को जगाने आयी हैं
हवाएं पैग़ाम लायी हैं..
आखरी मौका है प्यार मोहब्बत को सम्भालो यारो
अल्लाह राम गुसाईं है हाथ से फिसलती रेत, सम्भालो यारो
क्या पढेंगी नस्लें इतिहास, नस्ल सम्भालो यारो
इबादत-ए-सद्भावना हो दोबारा, ये उपहार लायी हैं
हवाएं पैग़ाम लायी हैं..
हवाएं पैग़ाम लायी हैं……
बिक्रम चत्तोवाल…
9873587510