विनाशकाय विपरीत बुद्धि “सैद्धांतिक व गैर सैद्धांतिक”

एक प्रश्न बहुत ही जोर जोर से उठ रहा है के क्या हमारे सभी स्वतंत्रता सेनानियों, वार शहीदों व् पूर्वजों ने इस भारत की कल्पना की थी के आने वाले निकट भविष्य में अगर कोई आने वाली सरकार से प्रश्न पूछे या मौजूदा सरकार से अलग सोच रखता हो तो उसे देशद्रोही घोषित कर दिया जाए ? क्या संसद में आज तक कभी भी सरकार की सोच से अलग सवाल नहीं पूछे गए वर्तमान सरकार जो कभी विपक्ष में हुआ करती थी ? क्या कभी इस ने उस सरकार से सवाल नहीं पूछे ? बिल्कुल पूछे और सरकार को घेरा भी व् सरकारों को मजबूर भी किया अपने फैसले बदलने के लिए ! तो आज माहौल ऐसा क्यों बनाया जा रहा है कि अगर किसी का सुविचार आप से नहीं मिलता है तो वह देशद्रोही हो गया ! ऐसा हिंदुस्तान होगा जो किसी की उपस्थिति को स्वीकारेंगा भी नहीं ऐसे भारत के निर्माण के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों व शहीदों ने अपने जीवन का बलिदान नहीं दिया था ! उनकी अपने देश के विकास के लिए दी गई कुर्बानी यह एहसास कराती रहती हैं के हमें हिंदुस्तानी होने के कारण अलग विचारों वाले हिंदुस्तानियों से नफरत नहीं करनी है ! इसका मूल सिद्धांत हमारे संविधान में भी लिखा गया है जिसे “बोलने की आज़ादी” व “अपना पक्ष रखने का अधिकार” भी कहा जाता है ! आज तक इसी सिद्धांत के चलते ही हमारा देश इतना आगे बढ़ पाया ! हमारे संविधान में अगर इतने दूरदर्शी व मौलिक अधिकारों का विवरण ना होता तो शायद हमारा देश इतना पिछड़ा होता, जिसका हम अंदाजा भी नहीं लगा पाएंगे ! शायद भारत में 29 राज्य होने की जगह 29 छोटे छोटे देश होने थे !
                   थोड़ा अगर व्यापक सोचा जाए तो हमारा देश या हमारे देश की सरकारें समाज में से धार्मिक कट्टरवादीता खत्म करने में विफल रही हैं ! अब तक तो लोगों को यह समझ जाना चाहिए था के धर्म की मान्यता घर के अंदर तक ही सीमित होनी चाहिए ! जैसे ही कोई भी अपने घर से बाहर कदम रखेगा तो उसकी मानसिकता तुरंत किसी धर्म, मजहब, जात-पात से भारतीयता में बदल जानी चाहिए थी ! संक्षेप में “घर से बाहर कदम रखते ही अपने भारत की ज़मीन पर चलते न के किसी हिन्दू मुस्लिम इलाके में कदम रखते !” लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी हम धर्म, मजहब, जात-पात के गुलाम हैं ! मेरी कविता की कुछ पंक्तियां बोलना चाहूंगा के “जिस्म की गुलामी से मुश्किल है मानसिकता की गुलामी, जिस पर लगाई जा रही है दौलत बेनामी !” इस द्वंद में अगर कोई सबसे ज्यादा द्वि मस्तकीये है तो वह है भारतीय किशोर या युवा जिसने अभी दुनिया को समझना शुरू ही किया है ! जिसका दिल कुछ और चाहता है, लेकिन उसको परोसा कुछ और जा रहा है ! वह समय क्या कभी नहीं आएगा जब मां-बाप यह कहेंगे के बच्चों रास्ता कभी मत भटकना, “अपने अंदरूनी दुश्मनों से बचना”, हमेशा दिल की बात सुनना क्योंकि दिमाग की बात करने वाले अक्सर कई बार गलतियां कर जाते हैं ! जबकि उनका दिल ‘ना’ करने के लिए संदेश दे रहा होता है ! फिर यह संदेश ‘काश’ में बदल जाता है, लेकिन तब तक सब खत्म हो चुका होता है ! अंत में मस्तिष्क व् मन को यही बोल कर समझाना पड़ता है के “शायद” भगवान यही चाहता था, इसीलिए यह सब हुआ ! यहां यह बता दें कि सृष्टि का नियम है कि जैसा काम आज आप एक “अच्छा फैसला” लेकर करोगे वही आपको आगे चलकर 10 गुना होकर मिलेगा !अनजाने में हुई गलती और जानबूझकर की हुई गलती में फर्क होता है और “फर्क सिर्फ चुनने का होता है” !निर्भर करता है कि आप क्या चुन रहे हो ! इसी के चलते हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुतियां दी थी कि हमारा देश किसी किस्म का गुलाम ना हो और तेजी से विकास की राह पर चल पड़े और हमारे भारत के लोग किसी रूढ़िवादिता में ना फंसे, हर किसी का अपना एक सिद्धांत हो, अपना एक दृष्टिकोण हो और जो सबसे अच्छा दृष्टिकोण देश हित में हो, वह देश का हो !
          लेकिन पिछले कुछ समय में जिस आधारभूत सिद्धांत को आज तक अपनाकर इतनी तरक्की करी वह कहीं ना कहीं क्षतिग्रस्त हुआ है और जो “नया सिद्धांत” हमारे ऊपर थोपे जाने की कवायद चल रही है, वह अगर सच में ही ठीक होता व देश हित में होता तो हमारे देश के लोग इतने समझदार हैं कि अब तक इसे अपना चुके होते ! लेकिन अगर इसे समझाने में या अपनाने में कहीं ना कहीं टकराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है तो यह “नया सिद्धांत” सच में ही देश हित में नहीं है और हमारे पूजनीय पूर्वज भी इसे नकार देते जैसे अभी देशवासी नकार रहे हैं !
जय हिंद जय भारत !

DEFENSE BUDGET – UPA Vs NDA

The MoD’s total expenditure in 2011-12 on Defence was 213673 crores and the Pay and Pension out of it was 92971 crores, which was 44% of the Budget. During UPA tenure the percentage remained almost the same. The capital expenditure was 56282 crores which was 26% of the Budget.

Consider the Revised estimates of 2018-19.

The MoD’s total expenditure was 405194 crores. The Pay and Pension out of it was 224522 crores, which is 56% of the budget. The Capital acquisition out of it is 74116 crores which is 18% of the budget.

Even the lethargic A K Anthony was spending a greater percentage of the Defence budget on capital expenditure.
The defence budget of 2018-19 is 1.8 times bigger than the the budget of 2011-12. The Pay and Pension budget is 2.4 times bigger than the budget of 2011-12. The capital acquisition on the other hand has increased only 1.3 times during this period. Thus it is clear that the NDA is using most of its defence budget on pay and pension and less on capital acquisition.

What is the meaning of this?

The UPA was spending 26% of its Defence budget on modernization, but the Modi government spends only 18%of its budget on that count. As a percentage of GDP the Defence Budget without including pensions is just 1.49% which is the lowest since 1962.

Kannan

(The author of this article is a PhD Scholar of TERI school of advanced studies, New Delhi. Views and figures  shared in this article are personal of the author. The Citizen Dialogue doesn’t endorse it.)

तर्क : आखिर हांसिल क्या हुआ !

 बात तब की है जब कुछ समय बचा है लोक सभा चुनाव के लिए पूरा देश चुनावी मोड में आ चूका था और विपक्ष सत्ता पर अपने चुनावी हमले दिन ब दिन तेज़ किये जा रहा था ! विपक्ष ने पूरा रुख विकास पर मोड दिया था और सत्ता पक्ष कहीं न कहीं बैकफुट  पर था और विपक्ष अपने पुरे कार्यकाल 2004 से 2014 में की उपलब्धियों को भुनाने में तत्पर था और सत्ता पक्ष जल्द से जल्द अपनी बंद पड़ी हुयी योजनाओं का शिलान्यास करके देश की जनता को यह बताना चाहता था की हमने यह सब प्रयोजनायो शुरू की है और कुछ प्रोजेक्ट्स जल्दबाज़ी में शुरू किये और सम्पूर्ण कराये गए जिनका हाल कुछ इस प्रकार हुआ की जो कैराना लोक सभा सीट के लिए सज्ज रोड का उदघाटन किया वो एक हफ्ते बाद ज़मीन में धंसती हुयी नज़र आयी हालांकि ये कुछ पुराणी बात है लेकिन शुरुआत तब से ही हुयी थी ! अभी हाल ही में महिपालपुर, दिल्ली बाईपास के पास से जो एक फ्लाईओवर और एक अंडरपास जो की महज़ 5-6 महीने ही पहले सीपीडब्ल्यूडी द्वारा शुरू किया गया था उसे सरकार का काम दिखाने के लिए इतनी जल्दी पूरा किया गया कि उसके उदघाटन के महज़ 2 दिन में ही उसकी सड़क ज़मीन में धंस गयी और पूरी सड़क में जगह जगह बड़ी बड़ी दरारें पद गयी ऐसे ही धौला कुआँ, दिल्ली की रेड लाइट पर जो एयरपोर्ट कॉरिडोर के लिए फ्लाईओवर बनाया उसका भी गीला सूखा निर्माण कुछ ही दिनों में देखने को मिलेगा !

                   अब बात करते है की सरकार को इतनी जल्दी किस चीज़ की है जो सभी प्रोजेक्ट रात को शुरू करके सुबह शिलान्यास कराना  चाहती है, यहाँ हम बता दें कि सरकार पर समय समय पर यह आरोप लगता रहा है कि सरकार विकास के नाम पर सत्ता में आयी थी लेकिन सत्ता सत्ता में आने के बाद अपने उसी पुराने मुद्दे पर कायम रही जो न तो किसी के काम के है, ना ही उसका किसी से सरोकार है ! टी वी चैनल्स ने भी खूब रोल अदा किया जो हर वक्त हिन्दू मुस्लिम बहस, गौरक्षा के मुद्दे (हालांकि अब भी बीफ कि बिक्री और निर्यात कम नहीं हुआ है जबकि सत्ता पक्ष ने बीफ कि कंपनियों से बाकायदा चंदा भी लिया है), और तीसरा व् आखरी अपने से विभिन्न सोच समझ रखने वाले को देश्ध्रोही का प्रमाण पत्र बांटना ! पिछले पांच सालो में बस इन् सनसनी खेज मुद्दों पर ही चर्चाएं चली है, विकास पर कोई बात हुयी नहीं लेकिन प्रधानमंत्री जी झूठे घोषणाएं ज़रूर कर दी जैसे के 4 सालों में 35 हवाई अड्डे बना दिए गए जबकि केवल एक ही हवाई अड्डा तैयार किया गया जो सिक्किम का हवाई अड्डा है वो भी केवल फंक्शनल किया गया जिसकी नींव भी यूपीए के दौरान रखी गयी थी !

                     अब जैसे ही चुनाव सर पर आन पड़े तो सरकार जल्दबाज़ी में विकास करना चाह रही है ! बचपन में एक कहावत सुनी थी के जल्दबाज़ी का काम शैतान का काम होता है और सहज पके सो मीठा होये ! अब क्या करें यही इस सरकार की पहचान बन चुकी है चाहे वह विमुद्रीकरण (नोटबॅंधी) के लिए लिया गया फैसला हो या फिर GST का लिया गया फैसला हो ! यह सब फैसले तो सही थे लेकिन जिस प्रकार यह ज़मीन पर जल्दबाज़ी में लिए गए इनका प्रभाव उल्टा पड़ गया और सरकार के गले की फांस बन गया ! इसी के चलते गोरखपुर में शुरू किया गया एम्स (AIIMS) जो की अभी निर्माणाधीन ही था उसकी OPD विभाग को पांच दिनों में मुक्कम्मल कराया गया जबकि उसमे अभी तक पूरा स्टाफ अभी तक आया भी नहीं था, अब आप ही बताएं ऐसे OPD में जाकर मरीज़ करेगा क्या, जहाँ डॉक्टर ही नहीं होगा का वहां के गार्ड से हाथ मिलाकर आएंगे अभी आज ही सुना की गटकारी जी ने दिल्ली से मुंबई जाने वाले DMIC कॉरिडोर का उदघाटन भी कर दिया और कहा है की जल्द ही इसपर काम भी शुरू होगा ! अब अचार संहिता लगने से बस कुछ ही दिन पहले ही शिलन्यास करने की होड़, कहीं न कहीं सरकार की विफलताएं ब्यान कर रही है !

                    उपरोक्त विकास कार्यों के शिलान्यासों की जल्दबाज़ी में कुछ ऐसा हुआ की सभी क्षुब्ध व् सन्न रह गए और यह था CRPF जवानो पर पुलवामा में किया गया आत्मघाती हमला, जिसे पुलवामा, कश्मीर के ही रहने वाले युवक आदिल अहमद डार ने मानव बम बन कर अंजाम दिया और जिसमे हमारे देश के 40 बहादुर CRPF जवान घटना स्थल पर ही शहीद हो गए ! बताया जाता है की शहीदों के शरीर के टुकड़े भी पता नहीं कहाँ कहाँ जाकर गिरे ! धमाका इतना भारी था की इसका रेडियस 100 से 150 मीटर तक था और इसमें इस्तेमाल किया गये RDX विस्फोटक  का वज़न 350 kg था ! पूरा देश सदमे में था और यह समझ नहीं पा रहा था कि अचानक हो क्या गया , हमले की ज़िम्मेवारी POK स्थित जैश-ए-मुहम्मद ने ली, जहाँ सरकार को बस यह दिख रहा था कि जल्द से जल्द इस हमले कि जवाबी कार्यवाही करके देश को बस यह बता दे कि हमारी सरकार एक निर्णायक व् जवाबदेह सरकार है ! हमला 14 फरवरी को हुआ था और 10 दिन बीत चुके थे और सरकार पर लोगो का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था हमारे देश का पूजनीय मीडिया खूब रोल अदा कर रहा था जो बार बार यह बोल रहा था के “हमें बदला चाहिए” ! आखिर 26 फरवरी 2019 को वही हुआ जो देश बहुत ही दिनों से उम्मीद लगाए बैठा था, लोगो का ध्यान अचानक से विकास कार्यो व् विकास के मुद्दों से हटकर पुलवामा अटैक और उसके लिए जाने वाले बदले पर टिका हुआ था, वहीं यह बता दें कि विपक्ष इस दुःख कि घडी में सरकार के साथ कंधे से कन्धा मिलकर खड़ा दिखा के जो भी सरकार का निर्णय होगा हम उसके साथ हैं जिसकी झलक तब दिखी जब विपक्ष ने अपने सभी प्रोग्राम स्थगित कर दिए, वहीं हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने अपने किसी भी राजनीतिक या सरकारी प्रोग्राम रद्द नहीं किये ! अब यहाँ हो न हो प्रधानमंत्री जी से चूक तो हुयी है ! अगर प्रधानमंत्री हमले के तुरंत बाद अपना जिम कॉर्बेट वाला कार्यक्रम रद्द कर घटना स्थल पर पहुँचते या केंद्रीय कैबिनेट सुरक्षा कि मीटिंग बुलाते और मौजूदा स्थिति कि जांच कर निर्णय लेते और एक या दो दिन का शोक घोषित कर देते तो शायद प्रधानमंत्री जी कि छवि जो उभर के आती तो 2019 चुनाव में किसी का ध्यान  विकास पर नहीं जाता ! बहरहाल, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और 26 फरवरी 2019 की तड़के 3:30 बजे भारतीय वायुसेना ने  पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जैश-ए-मुहम्मद के ठिकानों पर हमला करके नेस्तनाबुद्द कर  कर दिया ! उसमे कितने आतंकवादी मारे गए इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पायी है और न ही भारत सरकार ने और न ही भारतीय वायुसेना ने इस बात की पुष्टि की कि कितने आतंकवादी मारे गए ! लेकिन हमारे देश के मीडिया को सलाम करना चाहेंगे कि उन्होंने न्यूज़ रूम में बैठ कर ही 300-400 आतंकवादी मार गिराए ! जिस दिन यह हमला  किया गया उसदिन पूरा दिन हमारे न्यूज़ चैनल्स ने पता नहीं क्या क्या चला दिया ! देश में जो रोष था वो कुछ हद तक शांत हो गया ! लेकिन दूसरे दिन सुबह करीब 10 बजे जवाबी कार्यवाही पाकिस्तान ने भी कर दी जिसमे भारतीय वायुसेना बहुत ही बहादुरी से लड़ते हुए पाकिस्तान के 20 ज़्यादा  F-16 विमानों को भारतीय वायुसीमा से बहार खदेड़ दिया व् पाकिस्तान के एक लड़ाकू विमान को मार गिराया लेकिन इसमें भारतीय वायुसेना का हेलीकॉप्टर तकनिकी खराबी के कारन क्षतिग्रस्त हो गया व् जिसमे भारतीय वायुसेना के 4 वायुसैनिक मारे गए और F -16  को रोकते हुए हमारे दो लड़ाकू  विमान मिग – 21 (Bison) क्षतिग्रस्त हो गए व् एक लड़ाकू पायलट शहीद हो गए व् दूसरा लड़ाकू विमान F-16  को गिराकर वापिस आते हुए क्षतिग्रस्त हो गया जिससे बचने के लिए हमारे लड़ाकू पायलट ने आपातकालीन इजेक्ट करना पड़ा व पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लैंड करना पड़ा जिन्हे वहां के स्थानीय लोगो ने पकड़ कर पहले तो मरना पीटना शुरू कर दिया लेकिन पाकिस्तान सेना के एक मेजर ने अपने सैनिकों के साथ समय से आकर उनका बचाव किया व् गिरफ्तार  कर अपने साथ ले गए !

अब हमारी भारतीय वायुसेना का जांबाज़ पायलट विंग कमांडर अभिनन्दन वृथामन पाकिस्तान के कब्ज़े में थे ! लेकिन पाकिस्तान ने थोड़ी समझदारी दिखाते हुए 27  फरवरी 2019 को गिरफ्तार किये गए पायलट को 01 मार्च 2019 को जैसे के तैसे रिहा कर दिया ! यहाँ बता दें कि पाकिस्तान अगर यह शान्ति भरा कदम नहीं उठाता तो उसे इसके अनचाहे परिणाम भुगतने पड़ते क्योंकि पाकिस्तान कि अर्थव्यवस्था वैसे ही चरमराई हुयी है अगर भारत और आगे बढ़ता तो शायद पाकिस्तान पूरा तबाह हो जाता ! पायलट को वापिस करने के इलावा पाकिस्तान के पास कोई चारा नहीं था ! लेकिन भारत को भी एक सीख लेनी चाहिए कि पाकिस्तान की माली हालत खराब होने की वजह से हमारे पायलट आज हमारे पास है अगर ‘पायलट को पाकिस्तान देने से मना कर देता तो शायद हालात और बिगड़ सकते थे ! अपने भारत के न्यूज़ चैनल्स से यह दर्ख्वास्त करना  चाहेंगे कि कृपया फ़ौज की लड़ाई को न्यूज़ रूम की लड़ाई न बनाएं और सरकार से गुज़ारिश है कि युद्ध जैसी स्थिति बनने से रोकने की हर संभव कोशिश की जाये ! आखिर ये पुरे एपिसोड में चुनाव से पहले हमें आखिर हांसिल क्या हुआ ? यह सवाल अब भी वैसे का वैसा है ! लेकिन चुनाव में जाने के लिए तो विकास पर ही बात होगी ! हमारी सेना के बलबूते ऐसे युद्ध भारत पहले भी कई बार लड़ चुका है और जीत चुका है, जिससे सिर्फ और सिर्फ दोनों तरफ नुक्सान ही होता है !

जय हिन्द ! जय भारत !            

Bikram Chattowal

(The author is an article writer and seasonal poet. The views shared in this report are personal. The Citizen Dialogue doesn’t endorse it.)                            

Killing Each Other Saga : CRPF Convoy Attacked In Pulwama

With tears in the eyes whole country is praying for the soldiers, who lost their lives in cowardice suicidal attack on CRPF Convoy heading towards Srinagar on 14 Feb 2019 nearly at 3:30pm. A car sedan hit a convoy bus with 60 Kgs RDX after overtaking it and hit with full speed, within 2-3 seconds 40 CRPF soldiers martyred on the spot. The convoy was carrying 2547 troops in 59 vehicles. After this attack Punjab, Himachal, Haryana and Delhi are on high alert. Many dignitaries made their statements saying it’s intelligence failure or a proper information was missing etc. Many TV channels holding debates on it but debates are not the solution to it. The question here starts that where is “Security of Movement” how that militant came to know about the convoy ? Who have given them the information of Convoy ? How militant reached near the convoy bus and hit ? Why the car was not checked ? These are many loopholes which counters the attack. Nobody is questioning the Govt because it’s a security issue and everybody is saving the Govt. Nobody is asking to find the black sheep within the organisation by whom this information is leaked and caused 40 deaths of our brave soldiers.

PM says in a political rally yesterday that Army is ordered to take action as they want to answer this attack. Let’s see what action  would be taken by the Army ? Hopefully, it would work as a balm on wounded emotions of whole country and families of the deceased. The questions remains same that till when we will have to suffer, our Kashmir will have to suffer of this killing each other Saga ?

Bikram Chattowal

India Should Revisit The Pattern of Jobs Vacancies

India should work on pattern of filling up the posts/ vacancies. We wait till the posts be vacant. Which takes 1 or 1.5 yrs to fill up and another 2yrs to learn the official procedures which affect the pace of work. If we have Number of retirees, why cant we fill them before their retirement. Like, If an employee is going to retire after 4 yrs (@56 yrs of age) the process should be started at this stage, it vl take most probably 2 yrs to complete the appointment process. The retirees would reach at the age of 58yrs and new candidates will have 2yrs of Probation period i.e. the training period after this period where new candidate will be completing probation period and become permanent, retiring personnel will be completing 60yrs of age. It can help the Govt to fill the vacancies on Regular basis and its a continuous process. Currently, 1 lakh Central Govt Employees proceed for retirement every year, it will be increased by adopting this pattern. It can be filled easily prior to employees proceed for retirement. Some semi Govt organisations, NGOs and Corporates have already adopted it. It can be a game changer for any Govt to provide jobs on regular basis and enables the Govt procedures faster.

(The views of this article are author’s personal views , The Citizen Dialogue doesnt endorse these views)

भाजपा को अकाली दल की धमकी, न हो गुरद्वारों में हस्तक्षेप नहीं तो बुरे होंगे प्रणाम

बहुत दिनों से भाजपा और अकाली दल के अंदर ही अंदर चल रही कोल्ड वार आज उस समय सामने आयी जब महाराष्ट्र में नांदेड़ स्थित गुरद्वारे में भी भाजपा ने अपना व्यक्ति प्रधान बनाने की चेष्टा कर डाली |इसपर अकाली नेता श्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बयान देते हुए कहा के पहले पटना साहिब का मसला बड़ी मुश्किल से सुलझा ही था कि अब भाजपा नांदेड़ स्थित तख़्त हज़ूर साहिब पर कब्ज़ा करने की कोशिश जो कभी पूरी नहीं होने दी जाएगी उन्होंने साथ ही यह कहा की गुरद्वारों के प्रधान बनने के लिए प्रथम काबिलियत यह है की व्यक्ति अमृतधारी होना चाहिए उसके बाद चुनाव में अगर जीत जाता है तो प्रधान बन सकता है लेकिन अगर कोई कब्ज़ा करने की किसी द्वारा चेष्टा की जाएगी तो प्रणाम अच्छे नहीं होंगे | सिरसा ने कहा के अकाली दल ने बहुत बड़ी जंग लड़ी है और उस समय के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने अकाली नेताओं को यह आश्वासन दिया था की गुरद्वारों में कोई राजनितिक पार्टी हस्तक्षेप नहीं करेगी और एक पूर्व प्रधानमंत्री की बात को कैसे बाईपास किया जा सकता है |(रिपोर्ट : बिक्रम सिंह, संवादाता, दि सिटिज़न डायलाग)